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अखिलेश की रणनीति से सपा हुई विजयी

Posted On: 26 May, 2016 Politics में

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पिछले दिनों पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए, जिनके परिणाम लगभग मिले जुले ही रहे हैं. कहीं असम में भाजपा ने अपनी सरकार बनाई तो तमिलनाडु और प.बंगाल में सत्ताधारी पार्टियों ने अपनी सरकार बचाई भी. ऐसे ही केरल में वामपंथी पार्टियों ने सत्ता में वापसी की तो पुडुचेरी में कांग्रेस को भी सरकार बनाने का मौका मिला. हालाँकि, इन बड़े चुनावों के बीच आने वाले दिनों में देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के उप चुनावों के परिणाम को उतनी चर्चा नहीं मिली, जो आने वाले दिनों के लिए अपेक्षाकृत काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं! एक और बात इस बीच देखने को मिली कि पांच राज्यों के चुनाव परिणामों को लेकर कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर खूब हमले हुए तो कांग्रेसमुक्त भारत का नारा भी जोर शोर से उछला, किन्तु इस बीच किसी ने तथ्यात्मक बात नहीं करी कि आखिर कांग्रेस की ऐसी हालत क्यों हो रही है? हाँ, अखिलेश यादव ने इन विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों पर बेहद सटीक टिपण्णी जरूर की, जिसकी चर्चा आगे की पंक्तियों में करेंगे. पहले बात करते हैं उत्तर प्रदेश विधानसभा की उन दो सीटों पर हुए उप चुनावों का, जिसे जीतकर अखिलेश यादव निश्चित रूप से आत्म विश्वास से भर गए हैं. भारत के सबसे बड़े राज्य की राजनीतिक हलचल यूं भी काफी मायने रखती है और इस समय तो भाजपा समेत दूसरी पार्टियां भी इस प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनावों को लेकर काफी सजग हैं. कांग्रेस ने तो देश के राजनीतिक पटल पर उभरे चर्चित पॉलिटिकल कंसल्टेंट प्रशांत किशोर को हायर करके अपना सब कुछ झोंकने के मूड में दिख रही है. ऐसे में अगर कहा जाय कि अखिलेश यादव ने इन पार्टियों की महत्वाकांक्षाओं पर काफी हद तक प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है तो गलत न होगा. उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस सम्बन्ध में साफ़ कहा है कि राज्य की समाजवादी पार्टी सरकार ने अपने कार्यों के जरिये अवाम के दिल में जगह बनायी है और यही वजह है कि विधानसभा उपचुनाव के घोषित नतीजों में सपा की जीत हुई है. मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया है कि प्रदेश के विकास कार्यों में उनकी सरकार ने ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों की तरक्की में संतुलन बनाया है.

कहते हैं कि जब जीत का परिणाम आता है, तब आपकी नीतियों और रणनीतियों की परख कहीं ज्यादा नज़र आती है. बताते चलें कि सपा ने जंगीपुर और बिलारी विधानसभा सीटों के उपचुनावों में शानदार जीत हासिल की है. उत्तर प्रदेश के इन नतीजों से अखिलेश का आत्मविश्वास इसलिए भी बढ़ा है, क्योंकि इन दोनों सीटों पर भाजपा ही मुख्य प्रतिद्वंदी थी, जिसे उनके उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से हराने में सफलता प्राप्त की है. तभी तो इन सीटों के परिणाम आने पर अखिलेश यादव ने भाजपा पर तंज कसा कि उसे अति उत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है. जंगीपुर सीट से सपा की किस्मती देवी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बी.जे.पी. के कुंवर रमेश सिंह ‘पप्पू’ को 22092 वोटों से करारी शिकस्त दी है, जबकि बिलारी सीट से सपा प्रत्याशी मोहम्‍मद फहीम ने बी.जे.पी. के सुरेश सैनी को 7093 वोटों से हराया है. जाहिर है, असम में जीत का चारों ओर डंका पीटने वाली भाजपा यूपी के इन उप चुनावों को लेकर कुछ कहने को तैयार नहीं है, जबकि अखिलेश यादव खुलकर कह रहे हैं कि समाजवादी सरकार विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है और इसीलिए उनकी पार्टी जीत का स्वाद लगातार ही चख रही है. इस क्रम में यूपी के सीएम साइकिल चलाने वालों को ध्यान में रखते हुए लखनऊ सहित तमाम शहरों में साइकिल ट्रैक के निर्माण का कार्य शुरू करने को भी गिनाते हैं, जिससे आने वाले दिनों में प्रदूषण से मुक्ति और स्वास्थ्य के प्रति सजगता से भी जोड़ा जा रहा है. बताते चलें कि लखनऊ में अब तक 100 किलोमीटर साइकिल ट्रैक का निर्माण हो चुका है और 200 किमी का लक्ष्य निर्धारित है, जिसे जल्द पूरा करने की बात कही जा रही है. बाकी उत्तर प्रदेश द्वारा हर क्षेत्र में विकास करने को लेकर भी अखिलेश यादव दावा करना नहीं भूलते हैं कि ‘उत्तर प्रदेश सरकार के विकास के काम पर कोई भी उंगली नहीं उठा सकता है’. पिछले दिनों बदायूं में कई योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए युवा सीएम ने कहा था कि जनता के सहयोग से समाजवादी पार्टी ने ‘चार वर्ष में चालीस वर्ष’ के विकास का काम किया है. इसके लिए बिजली उत्पादन, सड़कें तथा एंबुलेंस सेवा को लगातार बेहतर करने का ज़िक्र करते हुए अखिलेश यादव ने रोजगार और पुलिस में भर्तियों पर भी अपनी सरकार की पीठ थपथपाई है. उनके इन दावों पर राजनीतिक विवाद बेशक खड़े किये जाएँ, किन्तु सच यही है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा उपचुनावों के नतीजों ने बाकी सबको चुप करा दिया है.

हालाँकि, यह बात भी कुछ हद तक सच है कि कानून व्यवस्था और बिजली को लेकर अभी अखिलेश सरकार को काफी कुछ करना है. किन्तु, यूपी के विकास पैरामीटर्स में लगातार सुधार आ रहा है, इस बात को न मानना अखिलेश यादव के साथ नाइंसाफी ही होगी. इन उपचुनावों की थोड़ी डिटेल में बात करें तो मुरादाबाद की बिलारी और गाजीपुर की जंगीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में क्रमशः 55 और 46% वोटिंग हुई थी. बिलारी सीट पर चुनाव में 3 लाख 41 हजार 211 वोटर्स ने वोट डाला था, जिसमें 1 लाख 55 हजार 384 पुरुष और 1 लाख 85 हजार 815 महिलाएं थीं. इसी क्रम में, जंगीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के तहत क्षेत्र के 211 मतदान केंद्रों के 323 पोलिंग बूथों पर वोट डाले गए थे, जिसमें साढ़े 3 लाख मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. अपनी विशेष रणनीति के तहत इस बार बिलारी से सपा ने मो. इरफान के बेटे मो. फहीम को उम्मीदवार बनाया था, वहीं जंगीपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने कैलाश यादव की पत्नी किस्‍मती देवी को चुनावी मैदान में उतारा था. जाहिर है, सपा की इस सम्बन्ध में अपनाई गयी रणनीति पूरी तरह सफल रही है. बताते चलें कि मो. इरफान और कैलाश यादव की मौत से खाली हो गई इन सीटों पर राजनीतिक सरगर्मियां काफी तेज थीं, किन्तु अंततः बाजी समाजवादी पार्टी के हाथ ही लगी. हालाँकि, भाजपा ने इन सीटों पर पिछड़ा कार्ड भी खेल था तो यूपी भाजपा के अध्यक्ष केशव मौर्य ने इन सीटों को भाजपा की झोली में डालने के लिए जी जान लगा दिया था. बसपा की रणनीति को भी इस सीट पर अहम माना जा रहा था, किन्तु अंततः अखिलेश की विकास पुरुष की छवि और सटीक रणनीति के आगे सब बौने साबित हो गए.

अखिलेश की परिपक्व राजनीति का उदाहरण कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर उनकी एक सार्थक टिपण्णी से भी मिलता है. कांग्रेस और राहुल की कड़ी आलोचनाओं के बीच अखिलेश यादव ने साफगोई से कहा कि राहुल गांधी को जिम्मेदारी मिलने पर ही वह परिपक्व साबित होंगे, अन्यथा कांग्रेसमुक्त भारत का नारा सच भी हो सकता है. जाहिर है, यह सूत्रवाक्य बोलकर अखिलेश यादव ने न केवल कांग्रेस को परिस्थितिजन्य सलाह दी है, बल्कि यूपी के 2017 विधानसभा चुनावों के लिए इशारा भी कर दिया है कि अगर कांग्रेस समाजवादी पार्टी से अलग होकर चुनाव लड़ी तो वह न केवल हारेगी, बल्कि उसके अस्तित्व पर और भी गम्भीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो सकते हैं. अखिलेश का यह इशारा काफी दिलचस्प तो है ही, साथ ही साथ भाजपा और बसपा के खिलाफ कारगर रणनीति की ओर भी इशारा करता है. हालाँकि, 2017 में अभी समय है और तब तक सपा कार्यकर्ताओं और सपा नेताओं में किसी प्रकार की खुशफहमी अखिलेश यादव के विकास कार्यों और उनकी साफ़ छवि के बावजूद पार्टी की रणनीतियों को नुक्सान भी पहुंचा सकती है. किन्तु, पिछले दिनों हुए एमएलसी चुनावों में एकतरफा जीत के बाद सपा ने इन दोनों सीटों को जीतकर यह साबित कर दिया है कि यूपी में अखिलेश यादव की राजनीतिक परिपक्वता का मुकाबला कर सकने योग्य विकास पुरुष की छवि का दूसरा व्यक्तित्व किसी अन्य दल में हाल-फिलहाल नहीं दिख रहा है और यही समाजवादी पार्टी की सबसे बड़ी ‘यूएसपी’ भी है जो युवाओं, महिलाओं और अन्य जातिगत समीकरणों में पूरी तरह फिट बैठती है.

मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lainey के द्वारा
October 17, 2016

سیدجون نگرانت شدم همراهتم که خاموشهتا یار که را خواهد و میلش به که باشد &#0›˜8;جانبÃ3§Ø²Ã2ŒØª مبارک باشه شهاب جون


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