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तुसाद संग्रहालय या ब्रह्मा का कार्यालय!

Posted On 29 Apr, 2016 Business, Politics, lifestyle में

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यूं तो मैडम तुसाद म्यूजियम में अपनी ‘मोम की प्रतिमा’ लगने की इच्छा किस सेलिब्रिटी की नहीं रहती होगी, किन्तु जब बात भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की करते हैं तो बात कुछ खास हो जाती है. खुद मैडम तुसाद म्यूजियम ने इस प्रोजेक्ट में काफी दिलचस्पी दिखाई और नरेंद्र मोदी ने उन्हें निराश भी नहीं किया. कला की तारीफ़ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने मैडम तुसाद के कलाकारों की तारीफ़ के पुल बाँध दिए तो उन्हें हिन्दू दर्शन के सृष्टि-रचयिता ‘ब्रह्मा’ जी का खिताब दे डाला! कइयों को पीएम की यह टिपण्णी थोड़ी अतिवादी जैसी लगी होगी, किन्तु वास्तव में जिस कला, समर्पण, तकनीक से मैडम तुसाद ने पूरे विश्व भर में अपनी खास छवि बना रखी है, वह तारीफ़ के काबिल तो है ही. मैडम तुसाद संग्रहालय का इतिहास भी बेहद रोचक है. बताते चलें कि, फ्रांस की क्रांति के साथ ही मैडम तुसाद संग्रहालय की नीव रखी गई थी. यूं तो मैडम तुसाद संग्रहालय की जनक मैडम मेरी तुसाद थी, लेकिन इसकी नीव फ़्रांस के डॉक्टर फ़िलिप कर्टियस ने रखी थी. सन 1761 में डॉक्टर फ़िलिप मोम के अंगो को चिकित्सा जगत में इस्तेमाल के लिए बनाते थे और इस डॉक्टर को मोम की आदमक़द मूर्तियां बनाने का भी अच्छा-खासा शौक़ था. 1761 में फ़्रांस के स्ट्रासबर्ग शहर में जन्मी मैडम मैरी तुसाद की माँ डॉक्टर फ़िलिप के यहाँ कार्य करती थीं और यहीं से मैरी को मोम के पुतले बनाने का शौक लगा. इसी क्रम में, फ़्रांस की क्रांति के बाद मैरी तुसाद लन्दन में फंसी रह गयीं जहाँ इस महान संग्रहालय की नींव पड़ी. इस विश्वविख्यात संग्रहालय की अहमियत हम इस बात से ही समझ सकते हैं कि मैडम तुसाद संग्रहालय कि सैकड़ों मूर्तियां इतनी जीवंत लगती हैं कि कभी-कभी देखने वालों को भ्रम हो जाता है कि कहीं उनके सामने ज़िंदा आदमी ही तो नहीं खड़ा है! आज लंदन के विशेष पर्यटक स्थलों में शामिल हो चूका मैडम तुसाद संग्रहालय लंदन के अलावा विश्व के दुसरे प्रसिद्ध शहरों जैसे एम्सटर्डम, लास वेगास, न्यूयॉर्क, हांगकांग और शंघाई में भी है. जाहिर तौर पर, हर साल लाखों की संख्या में दर्शक वहाँ जाते हैं और इतिहास के पन्नों को तमाम ‘सेलिब्रिटीज’ की दृष्टि से आंकलित करते हैं.

तुसाद के वैक्स म्यूजियम में दुनियाभर में अनेक क्षेत्रों के चर्चित व्यक्तित्व शामिल किये गए हैं, जिसमें खेल, राजनीति, आंदोलनकारी, फिल्म से लेकर मॉडलिंग तक के लोग शामिल हैं. ऐसे में, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इन चर्चित सख्शियतों के बीच शामिल होना अवश्य ही उनके समर्थकों को खुश कर गया होगा. हालाँकि, उन समर्थकों से ज्यादा खुश मैडम तुसाद के अधिकारी हुए होंगे, क्योंकि उनको जितनी चर्चा मिली और उनकी लोकप्रियता में इजाफा हुआ, उसे लेकर उनका खुश होना स्वाभाविक ही है. भारत के डायनामिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मोम के पुतले को मैडम तुसाड संग्रहालय में लगा दिया गया है. कुछ दिन पहले लंदन स्थित संग्रहालय से नरेंद्र मोदी के पुतले को नई दिल्ली लाकर पीएम मोदी को दिखाया गया था. अपने इस पुतले में, पीएम मोदी अपनी जानी-पहचानी सिग्नेचर स्टाइल में क्रीम कलर का कुर्ता और जैकेट पहने पीएम मोदी खड़े होकर नमस्ते कर रहे हैं. पीएम मोदी के पुतले की बात की जाय तो, चार महीने में एक लाख पचास हजार पौंड खर्च कर कलाकारों ने इसे बनाया है और अपने मोम के पुतले को देखते ही इसको बनाने वाली टीम की जमकर तारीफ हमारे प्रधानमंत्री ने की. उन्होंने तारीफ़ करने में कोई कंजूसी नहीं की और कहा कि “पुतले को बनाने वाले कलाकार परमपिता ब्रह्मा की तरह हैं और इसीलिए मैं भारत के प्रधानसेवक को अपने सामने खड़ा देख रहा हूं”. बताते चलें कि यह पुतला मैडम तुसाड के सिंगापुर, हांगकांग और बैंकाक शाखाओं में भी लगाया जाएगा. संग्रहालय के जनरल मैनेजर एडवर्ड फुलर ने गर्व महसूस करते हुए कहा कि “हमें मैडम तुसाड संग्रहालय के वैश्विक मंच पर पीएम मोदी का स्वागत करते हुए बहुत गर्व हो रहा है”.

विश्व के तमाम चर्चित और बड़ी सख्शियतों के साथ भारत की भी कई हस्तियां मैडम तुसाड संग्रहालय की शोभा बढ़ा रही हैं जिसमे “महात्मा गांधी” को वर्ल्ड लीडर कहा गया है और इसी क्रम में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, रितिक रोशन, ऐश्वर्या राय बच्चन, सलमान खान, करीना कपूर, माधुरी दीक्षित, कटरीना कैफ और सचिन तेंदुलकर जैसी बड़ी हस्तियां शामिल हैं. इसके साथ-साथ भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी भी तुसाद म्यूजियम में मोम के सांचों में ढले खड़े हैं. हालाँकि, कुछ भारतीय लोगों ने इस म्यूजियम का हिस्सा बनना स्वीकार नहीं किया है, जिसमें आमिर ख़ान और अक्षय कुमार जैसे सितारे शामिल हैं. हर व्यक्ति का अपना दृष्टिकोण होता है और ऐसे में कोई आवश्यक नहीं है कि हर व्यक्ति वही दृष्टिकोण अपनाए और दुनिया ऐसे ही चलती रहती है. मैडम तुसाद के बारे में भी यह उक्ति बिलकुल फिट बैठती है. वैसे भी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा उसकी तारीफ़ में जो बातें कही गयी हैं, वह उसके इतिहास में दर्ज ‘बेस्ट कम्प्लीमेंट्स’ में अवश्य ही शामिल हो गयी है और वह शब्द है ‘ब्रह्मा का कार्यालय’! जी हाँ, अब मैडम तुसाद म्यूजियम सिर्फ ‘प्रसिद्ध व्यक्तित्वों के मोम-पुतलों का संग्रहालय’ भर नहीं है, बल्कि उसकी जीवंत कला को हमारा पीएम ने एक ऊँचा दर्जा प्रदान किया है, जिसके लिए इस संग्रहालय के तमाम कलाकार उनको कोटि कोटि साधुवाद दे रहे होंगे तो दुनिया भर के छोटे-बड़े कलाकारों को नयी ऊर्जा मिली होगी, इस बात में दो राय नहीं!

मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
April 29, 2016

जय श्री राम मिथलेश जी बहुत अच्छा वर्णन विस्तार से किया बाकई ये लोग की जितनी तारीफ़ की जाए कम है हमने इनके लन्दन का म्यूजियम देखा था आज से ३६ साल पहले और गांधी जी की प्रतिमा के साथ फोटो भी खिची थी इनकी मूर्तियाँ ऐसे लगती जैसे जिन्दा लोग खड़े है केवल सांस नहीं चलती बाकी असल और मूर्तियाँ में कोइ फर्क नहीं.आप बहुत अच्छा लिखते परन्तु प्रतिक्रिया देने में महाकंजूस है थोडा दिल बड़ा करे.साधुबाद


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