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… तो ‘दलबदलू’ करेंगे ‘भाजपाई विचारधारा’ की रक्षा!

Posted On: 6 Sep, 2016  
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प्रेरित करता है यूपी सीएम का ‘मानवीय चेहरा’!

Posted On: 11 Aug, 2016  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आतंकवाद पर मुस्लिम चुप्पी का रहस्य? :- अपने आपको सेक्युलर मानने वाले समझदार लोग भले ही कितनी भी दलीले दें, मुसलमान चाहे कितना भी कहें कि आतंकवादियों का कोई भी धर्म नहीं होता। लेकिन इस सत्य को भी तो कोई नकार नहीं सकता कि संसार के सभी मुसलमान जिस कुरान को अल्लाह का फरमान और अपना एकमात्र पवित्र ग्रन्थ मानकर उसी के अनुरूप चलने की शिक्षा अपने बच्चों को देते हैं, उसी कुरान की अनगिनत आयतों में इस्लाम को न मानने वाले लोगों को लूटने और उनका क़त्ल करने को साफ़ साफ़ कहा गया है। इसके अलावा हज़ारों सालों से किसी भी मुद्दे पर चुप्पी रखने को उसके मौन समर्थन के रूप में ही देखा जाता है। यह भी सभी जानते हैं कि इन आतंकवादियों का एकमात्र एक ही मकसद है कि सारे संसार में कैसे भी सिर्फ और सिर्फ इस्लाम की ही हुकूमत हो, इसीलिए संसार की समस्त आतंकवादी घटनाओं में केवल मुस्लिम ही लिप्त पाए जाते हैं। इसके बावजूद दुनिया भर के 99.9% मुसलमानों द्वारा आतंकवाद के खिलाफ अपना मुंह न खोलने के कारण ही आतंकवादियों का मनोबल बढ़ता है। दरअसल, मुसलमान अपनी मक्कारी भरी इस चुप्पी की आड़ में अपने दोनों हाथों में लड्डू रखना चाहते हैं। अब अगर आतंकवादी दुनिया के सभी देशों में आतंक के बल पर और डरा धमका कर जोर जबरदस्ती से इस्लाम की हुकूमत कायम करने के अपने मंसूबों को पूरा कर पाने में सफल हो जाते हैं, तो ज़ाहिर है कि उसका सीधा लाभ आज चुप्पी रखने वाले सभी मुसलमानों को भी अवश्य मिलेगा, जबकि आतंकवादियों के असफल होने की सूरत में सेकुलरिज्म के नाम पर आज उनका समर्थन करने वाले लोग कल भी यह कहकर उनका साथ देंगे कि यह सब तो वो अच्छे लोग हैं, जिन्होंने कभी भी आतंकवादियों को अपना समर्थन नहीं दिया। अब यह तो दूसरे धर्मों को मानने वाले लोगों को ही तय करना है कि वो मुसलमानों की इस मक्कारी भरी चुप्पी और तथाकथित समझदार सेक्युलर लोगों की बात पर विश्वास करके अपने आपको भविष्य में इन मुसलमानों का ग़ुलाम बनाये जाने का जोखिम उठाने को तैयार हैं अथवा इस्लामीकरण के इस खतरे और आतंकवादियों को जड़ से नेस्तनाबूद करने के लिए आज और अभी से ही एकजुट होकर हर संभव प्रयास करेंगे।

के द्वारा:

प्रिय श्री मिथलेश जी, सादर नमस्कार. पाकिस्तान का निर्माण सांप्रदायिक आधार पर हुआ था. भारवर्ष के मुसलमानों नें इस्लाम आधारित एक मुस्लिम देश बनाया जिसका नाम पाकिस्तान रखा गया. भारत एक सेक्युलर राष्ट्र बना रहा.मोहम्मद अली जिन्नाह के Direct action के नारे से प्रेरित होकर भारी रक्तपात के बाद एक मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान बना. पाकिस्तान के निर्माण में मोहम्मद अली जिन्नाह की मुख्य भूमिका थी. जिन्नाह का कहना था की भारत और पाकिस्तान दो अलग अलग राष्ट्र हैं जो साथ साथ नहीं रह सकते.इसे जिन्नाह की two nation theory कहा जाता है. कश्मीर भी मुस्लिम बहुल क्षेत्र है. इस कारण कश्मीर को भी पाकिस्तान में मिलाने के प्रयत्न किये गए. पाकिस्तानी सेना नें कबायलियों के रूप में कश्मीर को हड़पने के लिए हमला किया. कश्मीर के राजा हरी सिंह नें Instrument o accession पर दस्तखत कर दिए. इस प्रकार कश्मीर का भारत में विलय हो गया.पाकिस्तान तबसे ही कश्मीर को बल पूर्वक हड़पने की कोशिश कर रहा है.कई आक्रमणों के बाद भी हर बार पाकिस्तान इन मुंह की खाई है. बंगला देश की लड़ाई में भी पकिस्तान को भारीई हार का मुंह देखना पड़ा. तभी से पकिस्तान बौखलाया का घी. पाकिस्तान के नेता व हुक्मरान यह कहते हिन् की वे भारत को . bleed करेंगे. मैं नहीं समझता की पाकिस्तान कभी भी कश्मीर समस्या का शांति पूर्वक हल चाहता है. इस्लाम में गैर मुस्लिम को काफिर कहा जाता है. काफिर के खिलाफ जिहाद करने का आदेश है. ऐसे मजहब के साथ कोई समझौता संभव नहीं है. समाधान यह है कि हमें पाकिस्तान की और से हमेशा सावधान रहना होगा और अपने को शक्तिशाली बनाना होगा. वीर भोग्या वसुंधरा.

के द्वारा:

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के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

पूरी तरह सहमत हूँ आपसे मिथिलेश जी । मुख्य न्यायाधीश महोदय के आँसू घड़ियाली ही अधिक प्रतीत होते हैं क्योंकि उन्हें सारा दोष अन्यत्र ही दिखाई दे रहा है, अपने गिरेबान में झाँकने की कोई आवश्यकता उन्हें अनुभव नहीं हो रही । अपना दही कौन खट्टा बताता है ? दूसरों पर उंगली उठाओ और स्वयं को सुर्खरू दर्शाओ । मीठा-मीठा गप्प, कड़वा-कड़वा थू । न्यायालयों में इतनी छुट्टियों के होने का कोई औचित्य ही नहीं है । निचले स्तर के न्यायालयों में खुलेआम भ्रष्टाचार तथा पक्षपात होता है तथा पीड़ित को ही दबाया जाता है, इस तथ्य से सभी परिचित हैं (संभवतः मुख्य न्यायाधीश महोदय के) । वकील निचले स्तर के न्यायालयों में ही नहीं, उच्च न्यायालयों तक में न्यायाधीशों की नाक के नीचे सीना तानकर गुंडागर्दी तथा जनसामान्य के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती । इस पर मुख्य नयायाधीश महोदय कुछ प्रकाश डालना चाहेंगे ?

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

मैं आपके विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ । सम्पूर्ण जाट समुदाय की छवि कलंकित हो चुकी है । तथाकथित विकासोन्मुख खाप पंचायतें और समुदाय के वरिष्ठ लोग यदि अन्य समुदायों से क्षमा-याचना नहीं करते हैं (जिसकी कि कोई संभावना नहीं है क्योंकि भिंडरावाले और उनके जैसे लोगों के कृत्यों के लिए भी आज तक किसी सिख संगठन ने क्षमा नहीं मांगी है, न ही कोई मुस्लिम संगठन अपने समुदाय के लोगों के निंदनीय कृत्यों के लिए ऐसा करता है और न ही कोई तथाकथित राष्ट्रवादी हिन्दू संगठन अपने 'देशभक्त' सदस्यों के कुकृत्यों के लिए ऐसा करता है) तो जाटों को आरक्षण तो अपनी दादागिरी से अवश्य मिलेगा लेकिन अन्य समुदायों की दृष्टि में सम्मान कभी नहीं । हरियाणा में तो उनका सामाजिक बहिष्कार आरंभ हो भी गया है ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

आपके विचार तर्कपूर्ण हैं मिथिलेश जी । न्यायालय के परिसर में जो कुछ भी हुआ, उसे देशभक्ति की आड़ लेकर उचित नहीं ठहराया जा सकता । वैसे भी हमारे देश में कानून की रखवाली का काला कोट पहनकर घूमते वकीलों द्वारा स्वयं ही हिंसा पर उतारू होकर कानून की धज्जियां उड़ाने की घटनाएं आम होती जा रही हैं । हाफ़िज़ सईद और हैडली जैसों का नाम लेकर कोई भी असत्यापित और अनर्गल बात कही जा सकती है जो कि कहने वाले के लिए अपने विरोधियों को बदनाम करने का अचूक अस्त्र बन जाती है क्योंकि जनमानस को तो देशभक्ति के नाम पर पहले ही भड़का दिया गया होता है । जब मामले न्यायालय में पहुँच चुका है तो न्यायालय को अपना काम करने दिया जाए । निर्दोष पत्रकारों, शिक्षकों और छात्रों पर शारीरिक आक्रमण किया जाना और महिलाओं तक से दुर्व्यवहार किया जाना कहाँ की राष्ट्रभक्ति है ?

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

जय श्री राम मिथलेश जी बहुत सही और तथ्य पूर्ण लेख हमारे नेताओ को आपस में लड़ना और लाशो पर राजनीती करने में मज़ा आता मीडिया भी ऐसे ही केसेस में डिबेट करके सनसनी फैला रहा आसाम पच्छिम बंगाल लेर्ल में चुन्नव आ रहे सो बिहार की तरह वातावरण बनाया जा रहा जो नेता मालदा पूर्णिमा फतेहपुर की आगजनी दंगो पर चुप रहे इस पर राजनीती करने लगे सुसाइड नोट साफ़ कहता लगता है मुस्लिम और दलित क़ानून से ऊपर समझते जाते हिन्दुओ पर कई जगह आत्याचार सब चुप कोइ अवार्ड वापसी नहीं हे राजनीती देश को तोड़ने और विदेशो में बदनामी की समस्या पैदा करेगी.इस फोरम में इतने अच्छे लेखो में इतनी कम प्रतिक्रियाये क्यों आती बुद्धीजीवी क्यों सोहे रहते.लेख के लिए साधुवाद

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय मिथिलेश जी, आप हर विषय पर लिखते हैं, लिखना भी चाहिए. पर क्या आपको यह नहीं लगता कि मजदूर-किसानों का नाम लेकर इन्हे ही उपेक्षित रक्खा जाता रहा है, पहले भी और आज भी. कुछ बड़े संगठित उद्योग भी आज आउट सोर्सिंग के माध्यम से कम मजदूरी में ज्यादा काम करवा कर मजदूरों का शोषण कर रहे हैं? आठ घंटे काम करने की संस्कृति व्यवहारिक रूप से अब हटती जा रही है? अच्छे अच्छे कुशल इंजीनियर/तकनीशियन आदि की तनख्वाह महंगाई के हिशाब से कम है? हाँ उच्च पदों पर काम करने वालों और निम्न पदों पर काम करनेवालों की तनख्वाह में अंतर बहुत ज्यादा है? किसानों और मजदूरों की समस्या को नजरअंदाज करने के कारण ही आज भाजपा का जनसमर्थन ग्रामीण इलाकों में कम हुआ है? राहुल गांधी राजनीति में मुख्य विपक्षी दल हैं, तो ऐसे मौकों का फायदा उठाएंगे ही. हाँ भारतीय मजदूर संघ जो भाजपा समर्थित हैं उन्हें भी अपनी बात रखनी चाहिए. दूसरे उन्नत देशों में मजदूरों/ श्रमिकों के साथ उतना भेद-भाव नहीं है..... श्रमिक वर्ग ही आर्थिक ब्यवस्था के रीढ़ हैं, ऐसा क्यों नहीं सोचा जाता है. सांसद और विधायकों की तनख्वाह तो चुटकी में, पलक झपकते बढ़ा दी जाती है पर श्रमिक वर्ग के लिए कितने समय लगाये जाते हैं? न्यूनतम मजदूरी में बृद्धि का समय क्या नहीं आया है? मैं समझता हूँ, आप इन समस्याओं से पूरी तरह से परिचित होंगे. यही वर्ग सबसे अधिक टैक्स भी देता है, जहाँ तक मेरी जानकारी है..... सादर, मैंने अपना विचार रक्खा है.....

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: munish munish

जय श्री राम मोदीजी के खिलाफ ज़हर फ़ैलाने का काम कुछ मीडिया हाउसेस कर रहे है क्या दादरी का मामला इतना बड़ा था की ३ हफ्ते तक उसपर बहस होती रहे और लेख लिखे जाए क्योंकि एक मुसलमान की हत्या होती है परन्तु हिन्दुओ की हत्या में चुप्पी क्यों केरल,असम,उत्तर प्रदेश और बंगाल में मुस्लिम तुष्टीकरण और हिन्दू पर अन्याय हो रहा मुस्लिम नेता ज़हर उगलते सब चुप जो लोग अवार्ड औत रहे उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया वे मोदी जी की जीत को पचा नहीं प् रहे कांग्रेस और वाम दलों के दवाब में कार्य हो रहा जबसे सोनिया गांधी की कांग्रेस हारी तबसे चर्च नाराज़ है और देश के विरुद्ध साजिस रच रहा जिसमे सेक्युलर लोग साथ दे रहे.आप सबको संतुष्ट नहीं कर सकते शत्रुघ्न सिन्हा और उद्धव ठाकरे भी तो ज़हर उगल रहे क्या किया जाहे विरोध मीडिया में नहीं पार्टी फोरम में दर्शाया जाता है.आपके अपने विचार है हम सहमत नहीं वैसे लेख अच्छा है.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम मिथलेश जी बहुत अच्छा लेख इंग्लिश मीडिया,समाचार पत्र इंडिया टुडे बीजेपी हिन्दू विरोधी और कांग्रेस समर्थक है.ये समाचार उनके विरुद्ध वाले पत्र ही नहीं छपते.कुछ ऐसे ही पत्रकार है बरखा दत्त करन थापर और ऐ बीपी न्यूज़ .किसी भी व्यं को विवादित करके मूल भावना से हट जाते जैसा हॉल के भागवतजी के व्यान से किया.सनसनी और ब्रेअकिंह न्यूज़ फ़ैलाने के नाम पर सब खेल चल रहा,ऐसे ही मामला बापू आसारामजी का है जिनके करोडो भक्त है उन्होंने ईसाई मिशनरीज की धर्मान्तर पर और हिन्दू धर्म और भगवानो की निंदा की पोल खोलनी शुरू कर दी तो सोनिया गाँधी से कह कर फंसवा दिया चर्च के पास बहुत पैसा है जिसे वे देश के सनातन धर्म के विरुद्ध इस्तेमाल कर रहे.कभी मुस्लिम या ईसाई धर्मगुरूओ के बारे में क्यों लिखा जाता जब मीडिया ट्रायल होने लगता तो अदालते भी कभी कभी प्रभवित हो जाती है.साधुवाद.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: kamleshmaurya kamleshmaurya




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